दोस्तों कोशिश करता हू गाने कि भोजपुरी गीत ,आपके प्रतिभाव कि अभिलाषा सह

सजनवा छोड़ के जावत हमार
सजनवा गैरो के होवत हमार
सजनवा निंदिया चूरावत हमार
सजनवा सुबह ना आवत हमार
सजनवा सपना भी छीनत हमार
सजनवा काहे ना चाहत हमार
सजनवा यादोमे आवत हमार
सजनवा अजहू ना आवत हमार
सजनवा काहे डरावत हमार
सजनवा करते अदावत हमार
सजनवा अब ना हसावत हमार
सजनवा देते ना दावत हमार
सजनवा काहे रुलावत हमार
सजनवा सूना ये संसार हमार
सजनवा नैन ना लडावत हमार
सहनवा काहे सतावत हमार
सजनवा राह दिखावत हमार
सजनवा आंखे दिखावत हमार
सजनवा मुखडा न देखत हमार
सजनव मैलवा न भेजत हमार
सजनवा वैब पे ना आवत हमार
सजनवा फौन न करावत हमार
सजनवा काह जलावत हमार
सजनवा जिते जी मारत हमार

सजनवा बैरी हो गए हमार
चिठ्ठीया हो तो हर कोई बांचे भाग ना बांचे कोई
करमवा बैरी हो गए हमार
जाए बसे परदेश सजनवा सोतन के भरमाये
ना सन्देश ना कोई खबरिया रुत आये रुत जाए
डूब गए हम बीच भंवर में (२) करके सोला पार
सजनवा बैरी हो गए हमार
सूनी सेज गोंद मोरी सुनी मरम ना जाने कोई
जटपट तडपे प्रीत बेचारी ममता आंसू रॉय
ना कोई इस पार हमारा, (२) ना कोई उस पार
सजनवा बैरी हो गए हमार….
करमवा बैरी हो गये हमार …..
फिल्म तीसरी कसम (१९६७)
सिंगर, मुकेश
म्युज़िक शंकर जयकिशन
गीतकार,प्रोड्युसर: शैलेन्द्र
डायरेक्टर, बासुभट्टाचार्य
स्टार, राजकपूर वहीदा रहेमान

सतीशकुमार फ्रॉम हैदराबाद कहते है ,
When I look at the past I really feel sorry for Indian cinema. A sensitive and poetic film of this class sank at the box office, leading to the death of its producer Shailendra due to financial crisis. This film is today recognized as one of the best movie by all critics and actors. Film is based on a story of the Phanishwer Nath Renu, one of renowned Hindi writers.
This film portrays story of Hiraman, a bullock cart driver and a dancer Hirabai. Hirabai is attracted to Hiraman due to his simplicity. She is going to a fair by Hiraman’s bullock cart to perform in drama. The bond between two grows stronger as the day passes at fair. But finally as the fair comes closer to end, the parting seems imminent due to external factors. Finally when fair is over, Hirabai has to go and two separates.
To quote Star and Style’s review of the film, “The way the cart driver and nautanki dancer meet, talk and discover each other and themselves at the same time and the manner in which they part are like a poem on celluloid with a thread of pain running through it.” Raj Kapoor and Vaheeda Rehamn has given the best performances of their career. Songs are worth listening for hours. A must watch.
નોસ્ટેલજીક યાદ આપી !
શૈલેન્દ્રનું ગીત , અમારા ગામના શંકર જયકીશનનું સંગીત અને કંઠ મુકેશનો …
માણવાની મઝા આવી.
અમારા ડીટ્રોઈટમા આ ગીત ગાઇ મુકેશે દુનિયામાથી વિદાય લીધી………………….
By: pragnaju on April 29, 2011
at 2:24 pm
પ્રજ્ઞાશુંજી આપનો પહેલો પ્રતિભાવ … ખૂબ ખૂબ આભાર ..આપના જ ગામના શંકર જયકિશન ! વાહ નામ સાથે જ ભવ્ય સંગીત યાદ આવી જાય
By: Dilip Gajjar on April 29, 2011
at 3:29 pm
दिलीपभाई मुकेशके उमदा गानोमे से एक बहोत ही सुंदर गीत चुना है आपने ..आपकी आवाज़ है ही मधूर दिलको छु के जाती है.आंखे भीग गई…आपने सजनवा गीत लिखा है वोह भी बहोत ही अच्छी तरीकेसे लिखा है और तिसरी कसमके बारेमे पढके सही भी दुख हुआ वन ओफ ध बेस्ट मुवी आई केन से धेट..शुक्रिया
सपना
By: sapana on April 29, 2011
at 8:05 pm
सपनाजी, आपने जो इतना समय और ध्यान देकर सुना तो .. कविता भी अच्छी लगी ..कलाकार का हौसला बढ़ाया ही इसके लिए फिर से आपका अंतःकरण से आभार ..में और भी रियाज़ पर ध्यान देकर गाऊंगा और बेहतर गाने आपके सामने पेश करनेकी कोषीश करूँगा..एसा मन होता है..आखिर मे मेरी एक पन्क्ति,
ક્લાકારને બસ કલાકાર જાણે
વધ કોણ તેના હ્રુદયને પિછાણે
आप जैसो का प्रतिभाव ही कलाकार की प्रेरणा है..
आपका अंतःकरण से आभारी..पुनः आयियेगा..
By: Dilip Gajjar on April 29, 2011
at 9:21 pm
Dilipbhai – Thanks a lot for sharing this Mukeshji’s gem. Lovely lyrics and music.
By: HANSA & RAJESH MEHTA on April 30, 2011
at 4:00 pm
अच्छा प्रयास है
हमे तो ये भी पसंद
ल: प्रीत गई धन धर्म गया
बिगड़े सारे काम
मी: तुम्हरे लिये रुसवा हुई मेरा नाम हुआ बदनाम
ल: अब लागी नाही छूटे राम
लागी नाही छूटे रामा
दोनों: चाहे जिया जाए, रामा चाहे जिया जाए
लागी नाही छूटे, नाही छूटे, नाही छूटे राम
चाहे जिया जाए
मी: वादे का तेरे किस को भला, ओ भला ऐतबार था
ल: फिर भी तमाम रात तेरा इन्तज़ार था
मी: ख़ामोशियों में हर किसी आहट पे चौंककर
ल: अजी आहट पे चौंककर, किसी आहट पे चौंककर
मी: कहना मेरे इस दिल का यही
ल: यही बार\-बार था
मी: कि लागी नाही छूटे राम
दोनों: चाहे जिया जाए
ल: यूँ ही रहा जो तेरी वफ़ा, ओ जफ़ाओं का सिलसिला
मी: बेआस होके टूट ही जाएगा दिल मेरा
ल: क्या गुज़री मुझ पे तुम ये किसी से न पूछना
मी: किसी से न पूछना, ओ किसी से न पूछना
ल: सुन लेना मेरी क़ब्र से
मी: आएगी ये सदा
ल: कि लागी नाही छूटे राम
दोनों: चाहे जिया जाए
By: pragnaju on April 30, 2011
at 5:08 pm
very nice one.
By: pravina on April 30, 2011
at 6:04 pm
Very Well Sung…. Dilipje…
By: Sudin Ghanekar, Goa. on June 10, 2011
at 11:26 am