Posted by: Dilip Gajjar | ફેબ્રુવારી 13, 2010

Huyi Shaam Unka

મિત્રો રજુ કરુ છું મારુ ગાયેલ હિન્દી ગીત, હુઈ શામ ઉનકા ખયાલ આ ગયા અને સ્વરચિત હિન્દી ગઝ્લ મધુર જિન્દગાની

Film : Mere Hamadam Mere Dost, Lyrics : Majrooh Sultanpuri

Music by Laxmi Pyare, Originally Sung by Mohmad Rafi.

मधुर  जिन्दगानी

तुझे   प्यार  करना  तेरा  प्यार   पाना  यही   जिन्दगानी

तेरी   प्रीत का  एक  मधुर  गीत  गाना  यही  जिन्दगानी

यहां की हरएक चीज आनी है जानी और फानी है फिर भी

समन्दर   में   गहरे  मुजे   डुब   जाना  यही   जिन्दगानी

नजर  को मिलाकर  सभी गम भुलाकर इसी पलमें जी लूँ

नहीं  साँसों  का है   कोई  भी  ठिकाना  यही जिन्दगानी

सभीकुछ   अलग   था   जहां  में   मधुर   अब  सभीकुछ

पियाके  मिलनसे  न   कुछ  भी  पुराना  यही जिन्दगानी

चमन  में बहारे तो आती है  जाती ख़ुशी और  फिजां  की

फुलोसे  ही   सिखा   सदा   मुस्कुराना   यही जिन्दगानी

सृजनशीलता हो  न  पायें  कभी  कम तो संहार  हो  कम

जीवन  मंच  पर   ही  सदा  छाये  रहना  यही जिन्दगानी

-Dilip Gajjar


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Responses

  1. સરસ દિલીપભાઈ.

  2. Dilipbhai

    Yes, Khayal Aa Gaya. Well sang.
    Vinoo Sachania

  3. तुझे प्यार करना तेरा प्यार पाना यही जिन्दगानी
    तेरी प्रीत का एक मधुर गीत गाना यही जिन्दगानी
    यहां की हरएक चीज आनी है जानी और फानी है फिर भी
    समन्दर में गहरे मुजे डुब जाना यही जिन्दगानी

    kya baat hai … very good.

  4. तुझे प्यार करना तेरा प्यार पाना यही जिन्दगानी
    तेरी प्रीत का एक मधुर गीत गाना यही जिन्दगानी
    very nice …!!!

  5. very nice gazal and very nice voice…mubarak tamane nava blog maate..aamaj pragati karata raho evi dua..
    sapana

  6. दिलीप सा’ब बहुत शुक्रिया बडी महेरबानी
    मेरी फरमाईश पे आपने ये गझल सुनाई॥

    रफी साब संगीतके एक नायाब सितारा है जिसकी सरमयी आवाझके हम दिवाने है। आपने उसे बहुत खुब निभाया ॥

    मेरे पास लब्ज नहि है के कैसे आपका शुक्रिया अदा किया जाय॥ आपकी बहुमुखी प्रतिभा देखकर मुझको थोडी ईर्षा होती है।

    हर किसीको ये खुबियां नहि मिलती॥

    और आपकी गझल। शुभानअल्लाह्‍॥ क्या खुब कहा है आपने!

    जीवन मंच पर ही सदा छाये रहना यही जिन्दगानी

    मै एक गुस्ताखी करना चाहता हुं तो अर्ज है…

    मिल जाये तो ये मिट्टी है नहि तो ये है बह्ते आंखका पानी
    उनके जाने के बाद पता चला क्या है, कैसी है जिन्दागानी ॥

    तुटे दिलसे सुर नहिं नीकलते फीरभी दिल रो कर गाता रहे
    कैसी है जिन्दागानी? हमारी तुमारी अधुरी कहानी जिन्दागानी॥

  7. माफ करना दिलीपसा’ब
    एक बार फिरसे में ही हुं।

    आपके प्रेझन्टेशनके लिये वापस आया! क्या खुब विझ्युलाइझेशन! आप तो भाई उस्तादो के उस्ताद हो!

    लंच ब्रेक है फिरभी;

    आपकी आवाझने शाम का जादु फेला दिया
    अरे! दोपहरसे हमने ए दिया क्युं जला दिया ?

  8. nice


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